Saturday, 31 December 2011

ON HAPPY NEW YEAR



यही साल का अंत हैं और नए साल की शुरुआत भी,
कुछ किस्से ख़त्म हुए हैं यहाँ और कुछ नए फलसफों की बारात भी.

गुज़रा वक्त सिखा गया सीख नयी, कुछ समझे मुझे पर ना समझे कई.
ये साल, मैं उनके सामने था और वो मेरे, और यही सोचा करे की क्या गलत क्या सही.

कुछ तमन्ना लिए कहता अलविदा, कुछ अरमान लिए नये का आगाज़ करू
कुछ रुखी सी बीती तस्वीरों में नये उल्लास का रंग भरूँ,

हर लम्हा एक शुरुआत हैं हर एक पल एक सौगात हैं
नये नये से इस साल में नयी अब हर बात हैं

ऐ ख़ुदा इतनी ताकत दे मुझे हर पल होसला बुलंद रहे
इस नये साल में मेरा दिल यही कहे
इबादत ना कम रहे, पर मेरी हिम्मत में भी दम रहे
खुद पर भरोसा करे और उस ख़ुदा का करम रहे.............

Tuesday, 27 December 2011

Dil Se


इतनी मुहब्बत हुई तुम से कि दोस्त कहने लगे बेवफा हो गया हम से,
अब जब दोस्तों के बारे में सोंचा तो तुम से बेवफाई कर बेठा..........

Saturday, 24 December 2011

ख्वाहिश.....


ख्वाहिश है ये के मेरे साथ तुम रहो , ख्वाहिश है ये के ये बात तुम कहों.
ख्वाहिश है ये हवा सा बनू मैं, ख्वाहिश है अमित पंछी बन मेरे साथ तुम बहो

शीतल जल हो अगर तुम किसी ताल का, ख्वाहिश है मैं ताल बन तुझको बाँहों में समेटे रखूँ
अगर उज्जवल मोती हो तुम तेज सफ़ेद चमक लिए, ख्वाहिश है सिप बन तुझे खुद में छुपा रखूँ

ख्वाहिश हैं तुम धड़कन बनो, इन सांसो कि सरगम बनो
मेरे प्राणों में रहो तुम मेरा तन और मेरा मन बनो

मेरी ख्वाहिश तो अपार  हैं, पर तुझ में ही मेरा संसार हैं
अब इस संसार से कोई वास्ता ना मेरा , बस एक तुझ से ही सरोकार हैं ...................

Monday, 19 December 2011

DIL SE

ये मोहब्बत क्या होती हैं जाने कब समझ पाएगा ये दिल......
हर किसी को इसकी अपनी ही एक समझ हैं,
पर उनकी समझ से समझ पाना हैं मुश्किल .........

Dil se......


अमित ये इश्क नहीं दर्द मैं मेरा
जब कभी हदें  पार करता हैं लब्ज़ बन जाता हैं........

Wednesday, 14 December 2011

Dil Se.....

क्या करू ये अजीब से हालत हैं
ये इश्क हैं या यूँही कोई बात हैं
क्यों इतना याद आता हैं वो मुझे
क्यों इतने उलझे से ख़यालात हैं ........

Monday, 5 December 2011

DIL SE....

तेरे जाने के बाद अक्सर सोंचा मैंने,
तू नहीं तो कोई और सही वो नहीं तो कोई और सही,

पर ज़िन्दगी की हकीकत इतनी आसन कहाँ होती हैं,
किसी के जाने पर भी उसकी यादें कहाँ खोती हैं
बाहें फैलाए कब तक इंतजार करू मैं,
 खुद को भुलाये कब तक बेक़रार रहू मैं

मेरे आंसू को पानी समझ ले वो अगर,
मेरी मुहब्बत को बीती कहानी समझ ले वो अगर.

तो फिर क्यों इस खुशफहमी में रहूँ की आएगी वो इक दिन,
 और कहेगी ना रह सकुंगी तुम्हारे बिन

क्यों ऐतबार करू मैं अपने झूठे दिल का,
क्यों बनू तमाशा इस महफ़िल का

ये जस्बात ख़त्म करने होंगी मुझे एक दिन,
सिखाना होगा इस दिल को रहना उसके बिन

मानना होगा की अब इस दिल में कोई और न आ पायेगा,
ये एहसास-ए-दर्द यूँही खत्म हो जाएगा ............

Tuesday, 29 November 2011

DIL SE....

उदास न हो यह कह कर कि कुछ खो गया हैं मेरा
ज़रा आँखे खोल और देख, तेरी मुहब्बत तेरे साथ हैं.
सर झुका कर मांग ले उस खुदा से
यकीं कर के तेरी इबादत तेरे साथ हैं

DIL SE....

जब वो साथ थी मेरे तो कहती थी कि तुम खामोश क्यों रहते हो
अब जब मैं तन्हा हूँ तो अपनी ख़ामोशी से ही बातें करता  हूँ ......

Thursday, 24 November 2011

खुशियाँ

ज़िन्दगी के बड़े दुःख को पाकर यह जाना मैंने दोस्तों...
ज़िन्दगी में छोटी खुशियाँ ज़ादा बड़ी होती हैं.....

Tuesday, 15 November 2011

संघर्ष ....

कभी संघर्ष कुछ पल ही हैं, कभी हर पल ही संघर्ष हैं,
कभी सघर्ष में जीना हैं, कभी जीना ही संघर्ष हैं.

जब बैसाखी हो हाथो में तो चलना एक संघर्ष हैं,
जब आँखों के सामने अँधेरा हो तो आगे बड़ना एक संघर्ष हैं.
कभी ICU में लेट खुदा को याद कर ,
एक एक सांस को लड़ना भी संघर्ष हैं.

इश्क को पाना भी संघर्ष हैं, इश्क को बचा पाना भी संघर्ष हैं,
गर टूट गया हो ये दिल तो, फिर यह जीवन बिताना भी संघर्ष हैं.

मेरी आरज़ू हमेशा से ही बड़ी हैं, उसके आगे अनेक समस्या खड़ी हैं,
उनसे लड़ना भीड़ना जूझना, कभी हार न मानना भी एक संघर्ष हैं.

ये संघर्ष अस्वाभाविक विचित्र हैं, इसके कई चरित्र हैं,
संघर्ष हैं विजय हो तो ख़ुशी भरपूर होती हैं,
गर ना मिले सफलता तो संघर्ष को जारी रखना भी एक संघर्ष हैं.......

Thursday, 10 November 2011

DIL SE....

ऐं खुदा कर ले कोशिश मेरे वजूद का इन्तहा लेने की,
मैं पाक मोहब्बत हूँ उसके दिल की, मिट जाना मेरी फितरत नहीं........

Saturday, 5 November 2011

DIL SE..

मेरी निगाहों में तेरी तस्वीर तो हैं मगर,
तुझ में खुद को देख सकु तो बात ही कुछ और हो..... 

Monday, 31 October 2011

कोशिशें....

मेरी कोशिशें नादाँ हो गयी, मचल उठी और कह पड़ी,
कब तक करता रहेगा मुझे,
इतनी हार मिली फिर भी क्या, समझ ना आई तुझे
मैंने कहा तू रुसवा ना हो, ये किस्मत कब तक सोती रहेगी
कुछ हो ना हो, कोशिशें तो होती ही रहेगी.............

Sunday, 30 October 2011

DIL SE..

अक्सर ज़ोर से लगने पर चलना सीखा देती हैं ठोकर,
पर यदि वो प्यार में लगे तो इन्सान दोड़ना सीख जाता हैं...........

Saturday, 29 October 2011

DIL SE..

मुझे लगता हैं अक्सर यह,
कल जो बिता वो एक ख्वाब हैं मेरा.
जब उठ कर सोचता हूँ उस कल को,
हर कल एक हिसाब हैं मेरा.

कुछ कमा लेता हूँ मैं हर शाम,
कुछ गँवा देता हूँ मैं हर शाम.
गर गँवाना ज़ादा हो तो,
दुःख बेहिसाब हैं मेरा.

मेरे रास्ते टकराए उनकी राह से,
ज़िन्दगी साथ चलने का ठान बैठे.
मोड़ आया और मुड़ गए वो,
अब हर कदम पर सैलाब हैं मेरा.

एसा हिसाब उसने किया हैं,
सब कुछ देकर खुद ही चल दिया हैं.
उसे खोकर अब खुद को पा रहा हूँ,
उसका साथ अब केवल ख्वाब हैं मेरा.

Thursday, 27 October 2011

प्यार....

प्यार एक नाम हैं, मेरे एक ख्वाब का,
पा सकू मैं अगर, खुशनसीब मैं रहूँ.
अगर न मिल सके मुझे वो तो
प्यार मेरा खुश रहें............

DIL SE......

जीवन एक त्यौहार हैं, खुशियों का व्यापार हैं.
प्रेम मूल तत्व यहाँ, प्रेमी एक खरीदार हैं.....

Tuesday, 25 October 2011

विचार

जब एकांत में कोई विचार आते हैं
वो आपको आपका परिचय करते हैं
ध्यान से समझे कोई उन्हें तो
वो आपका जीवन बदल जाते हैं..............

Saturday, 8 October 2011

DIL SE..

मुझसे बिछड़ अक्सर मेरे ही तकिये में छुप जाते थे मेरे ही आंसू
तभी शायद ये जहाँ मेरा दर्द समझ ना सका
सोचा बाँट लू दर्द अपना इस ज़माने के साथ
पर रो सकूं जिस पर वो कन्धा मिल ना सका............

तुझे पा कर रहूँगा

मेरी मुहब्बत के इन्तिहाँ तू ले कितने भी,
मुझे यकीं हैं के मैं तुझे पा कर रहूँगा

कई शिकायत हैं तुझे मुझसे आज भी,
पर आगे मैं कोई शिकायत का मौका नहीं दूंगा

यकीं हो चला हैं तुझे मेरी बेरुखी पर,
मैं अपने प्यार पर यकीं दिला कर रहूँगा

यह तो सच हैं की नहीं रह पाउँगा मैं तेरे बिना,
तुझे यकीं हो जाए इस बात का, इतनी  मुहब्बत जता कर रहूँगा

तुझे लगता हैं खो गया हैं तेरा प्यार कहीं,
मेरे प्यार से वो एहसास जगा कर रहूँगा

मेरी मुहब्बत के इन्तिहाँ तू ले कितने भी,
मुझे यकीं हैं के मैं तुझे पा कर रहूँगा...........

Friday, 7 October 2011

दिल से ......

ये एक नयी सुबह हैं
न कोई गम न कोई कलह हैं
नया सा दिख रहा हे ये आसमां
नयी से हर डगर हैं
बस चल निकला हूँ मैं घर से
मंजिल की किसे खबर हैं
अमित मानो तो बड़ी आसां हैं ये ज़िन्दगी
और बड़ा आसां ये सफ़र हैं.............

Thursday, 6 October 2011

वक्त.....

वक्त हर बात का एहसास करा देता हैं
वक्त हर सांस का मतलब समझा देता हैं
वक्त दर्द देता हैं अगर
तो वक्त ही मरहम लगा देता हैं............

Wednesday, 5 October 2011

मैं..........

कोशिशे कर हारा मैं, हार कर फिर की कोशिशें,
एक कदम चलने की चाहत में, गिरता हूँ कई बार मैं.
फिर भी हूँ अटल मैं, इरादों से सबल मैं,
अमित कंधो पर बोझ लिए रचने चला संसार नया

Saturday, 1 October 2011

वो कहती हैं ............


अचानक ही वो सहम जाती हैं और पूछ लेती हैं मुझसे
तुम मुझे कभी छोड़ोगे तो नहीं..
और मैं कहता हूँ मेरी जान हो तुम,
अपनी जान के बिना कोई रह सकता हैं भला..

वो कहती हैं डर लगता हैं मुझे
तुम साथ न होंगे तो में क्या करुँगी
मैं कहता हूँ बड़ी ही खुदगर्ज़ हो तुम
कभी सोचा हैं की तुम न होगी तो मेरा क्या होगा....

मैं कहता हूँ की भरोसा कर , हम हमेशा रहेंगे  साथ
पाओगी हमेशा तुम अपने हाथो में मेरे हाथ

वो कहती हैं की उसे भरोसा हैं मुझ पर
बस अपनी किस्मत पर यकीं कम हैं..
मैं कहता हूँ यकीं कर हमारी किस्मत पर,
मेरे साथ तुम्हारी किस्मत अकेली नहीं

कुछ मिल जाने पर भी वो खुश ना होती हैं
कहती हैं तुम्हे ना मिला तो मुझे मिलने का क्या मतलब हैं
इतनी मोहब्बत हैं उसे मुझसे के सब पाने पर भी न होने का एहसास हैं उसे..........

Friday, 30 September 2011

दिल से.........


कभी दिल से शिकायत होती हैं,
कभी दिल की इबादत होती हैं,
अक्सर में दिल से हैरान हो जाता हूँ,
अक्सर में दिल से परेशान हो जाता हूँ,
और कभी कभी यह भी होता हैं अमित
कि मैं इसी पर मेहरबान हो जाता हूँ.........

Saturday, 24 September 2011

विचित्र ....



विचित्र विचार का उन्माद हैं,
कुछ मोन हैं कुछ संवाद हैं,
कुछ शांत झील सा ठहराव
कुछ भीषण जल प्रपात हैं.
कुछ पथ के तिनके सा सूक्ष्म हैं,
कुछ वृहद उन्मुक्त आकाश हैं,
कभी जीवन का निर्मल जल
कभी चिता की आग हैं.
कभी मिलन का एक क्षण हैं,
कभी वियोग आघात हैं,
कभी तो यह स्वयं पर भी
करता नहीं विश्वास  हैं.
विचित्र विचार का उन्माद हैं,
कुछ मोन हैं कुछ संवाद हैं.....

Thursday, 22 September 2011


कभी रहा करती थी मेरे साथ वो , अब उसका साथ बस तस्वीर में ही बाकि हैं..
पर उससे कोई शिकायत नहीं हैं मुझे अमित, उसे भी हक़ हैं अपने दिल की सुनने का......

Wednesday, 21 September 2011

मैं जानता हूँ


मैं जानता हूँ तू ना मिलेगी मुझको
पर क्या मिल जाना ही सब कुछ होता हैं ?
मुझे तो पाने की राहत से ज़ादा , इंतजार में सुकून होता हैं........

Monday, 12 September 2011

दो ही अंजाम होते हैं,


दो पल की ज़िन्दगी के दो ही अंजाम होते हैं,
दिल के जीते जीत हो
दिल के हारे हार ..........

Sunday, 11 September 2011

कौन हैं.......


मेरे हालत कुछ इसे हैं अब, अपने ही शहर में अजनबी हूँ मैं.
यु तो दिखते हैं जाने पहचाने कई, पर इनमे से अपना कौन हैं.

तस्वीर सा हो गया हैं ज़माना सारा, सब देखते हैं मुस्कुराकर ज़ख्म मेरे,
इसे बुज़दिली कहू या बेपरवाही उनकी, सब देख कर भी कहता कौन हैं.

हिम्मत बढ़ाते थे जो हाथ कभी , अब दूर से ही जुड़े हुए हैं,
इन तकलीफों के साये में मेरे पास आता कौन हैं

कुछ ना कर सका तू अब तक, ये कह कर महबूब भी दूर हो गया मुझसे,
नाकारा सी ज़िन्दगी में आज कल, मुझसे दिल लगता कौन हैं.

Friday, 9 September 2011

अच्छा होता


ज़िन्दगी जो खर्ची हैं मैंने बेपरवाहो की तरह ,
अक्सर यूँ लगता हैं की कुछ कर लेता तो अच्छा होता
दिखता हैं जो बंद आँखों में मुझे,
आंखे खोलता तो वो ख्वाब ना रहता...........

Thursday, 8 September 2011

क्यों नहीं होता....


हमेशा क्यों इस ख्वाहिश में रहता हूँ अमित
की चुप रहू और वो सब समझ जाए .....
दिल के पास रहने पर भी उसे यह एहसास क्यों नहीं होता....

DIL SE


बड़ी मुद्दतो के बाद यह तोहफा पाया हैं,
मेरा दिल आज फिर तन्हाई में आया हैं............

कुछ ऐसा कर


खुदा कुछ ऐसा कर कि मेरा दर्द मेरी ताक़त बने और मुझे मेरी मंज़िल मिले.
ताकि मैं अपने दर्द देने वाले का भी शुक्रिया अता कर सकु ...........

यु भी तो हो


बहती हैं मेरी निगाहों में तुझसे मिलने की चाहत कोई ...
कभी यु भी तो हो की कोई अश्क तेरी निगाहों में भी मचले ....

हैरान हूँ


मुझे खुद से मुहब्बत और बड़ गई हैं, इसीलिए खुद से शिकायत भी बड़ गई हैं.
अब हैरान हूँ की खुद से इश्क करू या तकरार.

हार हो....


हार हो तो विचार कर, फिर खड़ा हो वार कर.
कोशिशो को साथ रख, तू ही जीतेगा याद रख.
जीत हो तो गर्व कर, पर ना कभी अहंकार कर.
हसरते होगी पूरी तेरी, मीत यह विश्वास कर.
हार हो तो विचार कर, फिर खड़ा हो वार कर.

पापा कहते हैं...

पापा कहते हैं हमेशा यूँ ही होता हैं, जो दिल से चाहता हैं वो ही पाता हैं.
तू भी कर मेहनत सब ठीक हो जाएगा, पापा कहते हैं तू भी अपनी मंज़िल को पाएगा....

Wednesday, 7 September 2011

ढूंढ़ रहा हूँ..........


जीने के इशारे ढूंढ़ रहा हूँ , खोये हुए किनारे ढूंढ़ रहा हूँ 
तेरी बेरुखी बर्दाश्त नहीं होती, कोई रुख मेरी और ढूंढ़ रहा हूँ.

तेरे लबो पर रहते थे जो लब्ज़ कही खो गए हैं मेरे ही कारण
मिल जाए तुझे फिर से वो लब्ज़, वो वजह वो कारण ढूंढ़ रहा हूँ 

खता की मैंने जो बेपरवाह हो गया था मैं
कर सकू तेरी परवाह वो मोका वो आलम ढूंढ़ रहा हूँ 

इश्क होता हैं मुश्किल से , उससे भी मुश्किल उसे जाताना होता हैं
जाता सकू मैं मेरा प्यार तुझे , वो वक्त वो पल ढूंढ़ रहा हूँ.

तेरे साथ रहू मैं उम्र भर बस यही एक ख्वाब हैं मेरा 
मेरा ख्वाब पूरा कर  सके वो पूजा वो इबादद ढूंढ़ रहा हूँ