तेरी वो तस्वीर मेरे पास ही रहने दे,
जो एहसास -ए-आम हैं तेरे लिए, वो मेरा ख़ास ही रहने दे,
बस इतनी सी इल्तेज़ा हैं तुझसे
भले ही तू चली जा, पर तेरे होने का ये एहसास ही रहने दे.
लिख कर कह देता हूँ हाल-ए-दिल अपना अमित,
अब कोई सुनता ही नहीं यहाँ मेरे बताने पर
बात कर लेता हूँ अब खुद से ही मैं
और समझने भी लगा हूँ अपने दिल के समझाने पर
ये घनघोर काली परछाई हैं
ये रात फिर चढ़ आई हैं
पर दिल तू चिंता न कर
ये तो बस एक परछाई हैं
कल जब चढ़ेगा सूरज तेज
और इस अंधियारे को भेद
किरण आएगी आंगन तेरे
पूरे होंगे सपने तेरे
तो अमित काहे की रुसवाई हैं
ये तो बस एक परछाई हैं...
लम्हा मेरे कल का मेरे आज से टकराया हैं
उसमे कुछ बातों का कुछ यादों का कुछ जस्बातों का साया हैं
ये दिल थोड़ा परेशां हैं थोड़ा घबराया हैं
पर कोई बात नहीं अमित, मेरा कल मुझे आज समझ आया हैं...