Wednesday, 18 December 2019

एक बस तुझ से ही प्यार हैं।

तेरी तलब, तेरी चाहत, तेरा इंतजार हैं, 
और क्या कहू आदी, एक बस तुझ से ही प्यार हैं। 

Friday, 13 December 2019

जो तेरी तपिश से दूर हुआ....

उछला कूदा, खुश हुआ, 
मदहोश और मगरूर हुआ 
फिर बर्फ से जमें सब अरमान 
जो तेरी तपिश से दूर हुआ 

Monday, 2 December 2019

मैं ठिकाना ढूंढ लूं....

तेरी निगाहों में बसती है दुनिया मेरी
ज़रा इधर तो देख, मैं ठिकाना ढूंढ लूं

Wednesday, 6 November 2019

घर छोड़ आया....

चूज़े को घोंसले मे रख, परिंदा शहर छोड़ आया, 
मैं भी मेरा बच्चा, मेरे घर छोड़ आया।

Sunday, 20 October 2019

तुम्हें बताती भी तो कैसे..

ठहरी हुई थी मुद्दत से जो बात, जुबां पर आती भी तो कैसे,
मैं अपना हाल-ए-दिल, तुम्हें बताती भी तो कैसे

बस गया था निगाहों में तेरा जो चेहरा,
वो किसी और को दिखाती भी तो कैसे,

तू टकराता रहा मेरी राहों में, मुझसे अक्सर,
पर मैं तेरी राहों में तुझसे टकराती भी तो कैसे,

तुझे तन्हा खड़ा देखा, फिर भी तुझ तक आ न पाई,
मैं अपनी तन्हाइयों से लड़ पाती भी तो कैसे,

बहुत कोशिशों बाद, कुछ अक्षर जोड़ें तो थे मैंने,
पर उन शब्दों को बयान कर पाती भी तो कैसे,

वादा किया था खुद से, के करीब आकर बताऊंगी तुझे सब कुछ,
पर दूरियां ही इतनी थी, कि वादा निभाती भी तो कैसे,

ठहरी हुई थी मुद्दत से जो बात, जुबां पर आती भी तो कैसे,
मैं अपना हाल-ए-दिल, तुम्हें बताती भी तो कैसे ।

अमिदित्या..... 

Wednesday, 16 October 2019

चंदा भी अच्छा लगता हैं

हर वक़्त गरम क्यों रहती हो
मुझे ठंडा भी अच्छा लगता हैं
सूरज क्यों बनना हर पल
मुझे चंदा भी अच्छा लगता हैं 

Monday, 14 October 2019

तुम याद आ गए

जब देखा एक जोड़े को
चलते
ठहरते
टहलते
टकराते
ठहठहाते
रूठते
मनाते
एक दूजे को टकटकाते
दुनिया से बेख़बर
हाथों मे हाथ डाले
चले आते
तुम याद आ गए

Tuesday, 8 October 2019

और चल उठे...

दूजे के दिए बचाने मे,
अपने हाथ ही जल उठे।

प्रेम राग सी लगते थे कभी,
मेरे अल्फाज़ आज खल उठे।

गए थे मज़दूरी पे जिनके ख़ातिर,
वो ही बक्सा लिए और चल उठे।

बुखार हो ना हो।

जड़ बुद्धि कर दो मुझे,
मेरा कोई विचार ना हों।

विमुक्त विरक्त कर दो मुझे,
किसी से सरोकार ना हो।

दवा तो तुम दे ही दो मुझे,
भले ही बुखार हो ना हो।

Tuesday, 1 October 2019

तेरी याद आ रही है

क्यों हवाएं इतनी सरसरा रही हैं,
क्यों ये पेड़ों को डिगा रही हैं,
क्यों ये पत्तों को गिरा रही हैं,
क्या इन्हें भी तेरी याद आ रही हैं।
.... अमिदित्या

Friday, 27 September 2019

अब कभी वैसी रोशनी नहीं जाती

पहले अक्सर रोशनी चली जाया करती थी
नियमित छह से आठ,
उस अंधेरे से उदासी थी कम
खुशियाँ थी ज्यादा
किताबें बंद कर भाग उठते
ओटले पे सब इकठ्ठे हो जाते
रोज़ नए खेल शुरु हो जाते
कभी अंताक्षरी, कभी ताश
कभी कुछ ना दिखने पर भी क्रिकेट
मम्मी चाची सब आते बाहर
और गुफ़्तगू भी शुरू
हमारी जमघट देख पड़ोसी भी
खुद को रोक ना पाते
इतने मज़े करते के उस अंधेरे मे भी
सुकून मिलता था

अब रोशनी नहीं जाती
अब किताबें खुली ही रहती हैं
ओटले तो हैं ही नहीं
अब कोई इकट्ठा नहीं होता
ना कोई अंताक्षरी
ना कोई ताश
और ना कोई क्रिकेट
ना वो जमघट रही
ना वेसे पड़ोसी रहे
अब इस उजाले मे भी सुकून नहीं

और कभी रोशनी चली भी जाए तो
मोबाइल की रोशनी से चहरे चमक उठते हैं
अब कभी वैसी रोशनी नहीं जाती

Saturday, 24 August 2019

फीकी हैं...

मुझे मिलती हैं ज़मानें की वाह वाहीयां कई,
तुम्हारी तारीफ़ ना मिले तो हर बात फीकी हैं।

मुलाकातें तो होती हैं खुश मिजाज़ौ से अक्सर,
गर  तुमसे नज़र ना मिले तो हर मुलाकात फीकी हैं।

भरें पढ़े हैं ऐश-ओ-आराम के साधन कई,
गर साथ तुम ना हो तो ये कायनात फीकी हैं।

सुकूं मिलता होगा मखमली गद्दौ और रेशमी  चादरौ मे,
गर साथ तुम ना हो तो हर रात फीकी हैं।

Friday, 24 May 2019

वैवाहिक वर्षगांठ

तेरी निगाहों मे बसते हैं राज़ कई,
मुझे देखने के हैं अंदाज़ कई,
वो जो कल की बात थी , पहली मुलाकात थी,
आज भी होता हैं मुझे एहसास वही.

चतुर्थ वैवाहिक वर्षगांठ की शुभकामनाएं

वैवाहिक वर्षगांठ

ज़बरदस्त गर्मी मे, सुहानी शाम तुम,
इस भागम् भाग मे, थोड़ा सा आराम तुम,
मेरी शख्सियत, मेरी हैसियत, कुछ नहीं बिन तेरे,
मेरा रुतबा, मेरा नाम तुम.....

आदित्याराजे वैवाहिक वर्षगांठ की हार्दिक शुभकामनाएं

Monday, 4 March 2019

असरदार होता हैं....

दर्द मे मरहम की बात निकली हैं, तो हम भी बता दे,
उनका, हमें देख कर मुस्कुराना भी बड़ा असरदार होता हैं।

Friday, 4 January 2019

एक तरफा कहानी

एक तरफा कहानी के दीवाने सभी
क्या दूसरा पहलू भी देखा है कभी
सुना दो सज़ा पैरवी के ही बग़ैर
पुलिस जज वकील बन बैठे हैं सभी 🤔🤔