A Mirror of Mine......
दूजे के दिए बचाने मे, अपने हाथ ही जल उठे।
प्रेम राग सी लगते थे कभी, मेरे अल्फाज़ आज खल उठे।
गए थे मज़दूरी पे जिनके ख़ातिर, वो ही बक्सा लिए और चल उठे।
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