Friday, 23 February 2024

छीनी है

ठहराव का सुकून नहीं,
बदलाव की बेचैनी है।
कुछ कर गुजरने के जुनून ने,
रातों की नींद भी छीनी है।

... अमिदित्या 

मांझी हो गया

 पत्थर को तोड़कर निकला है अभी-अभी
 देखो छोटा सा बीज भी मांझी हो गया।

....अमिदित्या 

किरदार पर पहुंचे हैं

जाने कितने किरदारों से होकर, 
हम इस किरदार पर पहुंचे हैं।
जाने क्या क्या करा तब जा कर, 
हम इस कारोबार पर पहुंचे हैं।

लगा उन्हे था आसानी से, 
पा लिया इस ओहदे को,
 कई दीवाली घर ना गए, 
तभी इस त्यौहार पर पहुंचे हैं।

सख्ती को पिघलाया भी,
और पिघल के सख्त बने,
बहुत सी तपिश से गुजरे,
तब इस व्यवहार पर पहुंचे हैं।

ना बोलने में गुणी थे हम,
ना लड़ने में थे महारथी,
तसल्ली से धार करी तब जा कर
कलम के हथियार पर पहुंचे हैं।

.... अमिदित्या 

Friday, 16 February 2024

सीखा हैं

लोभ ही ना रहा इस तख्त ओ ताज का मुझे,
मैंने तो केवल दिलों पर राज करना सीखा है।

कभी कमी न रखी तेरी ख्वाहिशों को पूरा करने में,
मैंने तो केवल खुद को मोहताज करना सीखा हैं।

वो कहते हैं मुझे, तुम तो हुकुम ही नहीं चलाते हो,
उन्हें क्या पता मैने बस काम काज करना सीखा हैं।

हर झगड़े को जैसे तैसे अंजाम तक पहुंचाया था मेने,
फिर क्यों तुमने नई बहस का आगाज़ करना सीखा हैं।

तुम्हे तो हर हाल में खुश रखा था न मैने,बोलो ना,
फिर क्यों तुमने हर वक्त मुझे नाराज़ करना सीखा हैं।

  ....  अमिदित्या