Saturday, 24 August 2019

फीकी हैं...

मुझे मिलती हैं ज़मानें की वाह वाहीयां कई,
तुम्हारी तारीफ़ ना मिले तो हर बात फीकी हैं।

मुलाकातें तो होती हैं खुश मिजाज़ौ से अक्सर,
गर  तुमसे नज़र ना मिले तो हर मुलाकात फीकी हैं।

भरें पढ़े हैं ऐश-ओ-आराम के साधन कई,
गर साथ तुम ना हो तो ये कायनात फीकी हैं।

सुकूं मिलता होगा मखमली गद्दौ और रेशमी  चादरौ मे,
गर साथ तुम ना हो तो हर रात फीकी हैं।