Tuesday, 15 December 2020

Be Aromatic

"Be Aromatic, 
So you can delocalize and stabilize your negativity"
-Chemistryकबीला

Tuesday, 27 October 2020

निगाहों से गुफ़्तगू

निगाहों से गुफ़्तगू का यही लुत्फ़ हैं जनाब, 
वो कहती रही बिना कुछ कहे, 
मैं सुनता रहा बिना कुछ सुनें।

Tuesday, 11 August 2020

राहत चला गया

लम्हा, सदी, युग चला गया,
इश्क, मुहब्बत, चाहत चला गया,
तुम खाली रह गए इंदौर वालों 
तुम्हारे शहर का राहत चला गया। 
 🙏अमिदित्या🙏

Sunday, 14 June 2020

बिना लड़े मरो नहीं

लड़ो तुम डरों नहीं
दुख से इतना भरो नहीं
कहना ही भूल जाए ये जुबां
ख़ामोश इतना रहो नहीं
बिना लड़े मरो नहीं 

Thursday, 28 May 2020

ख़ुद को ही मेरे पास रख दो...

इस नाउम्मीदी मे एक आस रख दो, 
मेरे दरमियान कुछ ख़ास रख दो, 
और कुछ नहीं ख़्वाहिश अब मेरी, 
बस ख़ुद को ही मेरे पास रख दो।

वर्षगाँठ पाँच

हाथ मे हाथ थामे 
निकल पड़े थे दोनों 
ना सफ़र का पता 
ना डगर का 
ना कश्ती का पता 
ना किनारे का 
हौसला था बस 
एक दूजे का साथ देने का 
हाथ थामे रहने का 
एहसास था बस 
बिन  बोले सब कुछ सुनने का 
बिन कहे सब कुछ समझने का 

कहा से आया ये हौसला 
नहीं पता 
बस यही पता
के वो रहेगा हमेशा 
हर लम्हा, हर दिन, हर साल 
जैसे पांच सालों से हैं 
और रहेगा आखिरी सासों तक 


तुझ से बंध के खुल गया हूँ....

तुझ से बंध के खुल गया हूँ, 
पानी मे शक्कर सा घुल गया हूँ, 
सीखा था जाने क्या क्या इस ज़माने से, 
तुझे पढ़ कर सब भूल गया हूँ।

Thursday, 23 April 2020

मेरा शहर बदला गाँव मे....

भलाई हैं ठहराव में,
बाँधलो बेड़ियाँ पाँव में , 
पागलों सा दौड़ा था जो, 
मेरा शहर बदला गाँव में। 

Saturday, 22 February 2020

और पढ़ने चल दिये..

अपनी बुजुर्गीयत को फिर जवाँ करने चल दिए
तीस मे दाखिला लिया, और पढ़ने चल दिये 

Tuesday, 11 February 2020

आ कपड़े धो दूँ...

मैं दफ़्तर से लगा लाया परेशानियों के कुछ दाग,
वो देखते ही बोली, आ कपड़े धो दूँ