Friday, 31 August 2012

DIL SE...

काफूर हो गए मेरे ज़ख्म सारे,
जो तेरी एक हंसी देखी,
ना आना मेरी कब्र पर आंसू लेकर,
उन्हें पोछने को मैं फिर खड़ा ना हो जाऊ.....
(बाद में कहना मत की डरा दिया)........
          

Sunday, 26 August 2012

DIL SE....


खों जाने का जूनून जाने क्यों इस कदर भरा हैं मुझ में
यूँही निकल जाता हूँ अनजानी सी राहों में

कुछ अजनबी से चहरे यार बन जाते हैं
एक अपनापन  दिखता हैं उन सब की निगाहों में

उनका गम मिटने को कुछ हँसी तोड़ लाता हूँ
और ख़ुशी फैलता हूँ मैं उनकी फिजाओ में

ये सफ़र हैं चार कदमो का,अमित यह इल्म हैं मुझे
जिंदादिली से जीता हूँ अपनी ही अदाओ में

Thursday, 16 August 2012

यूँही बेजबरन में.....

कह  दू तो उन्हें आपत्ति हैं
नी कहू तो हम पर विपत्ति हैं
सड़क पर चलते सब लोग
क्योकि ये सरकारी संपत्ति हैं

सड़क तो काली काली हैं
लगता हैं वेस्टेनडिज़ वाली हैं
आगे चौराहे पर सर्कल हैं
न बगीचा हैं  न माली हैं

इंदौर का बगीचा तो मेघदूत का हैं
जहा आवारा जोड़ा बेठता  हैं
जो कोई पकड़ ले नजदीकियों  में
तो फिर बगलों को ही देखता हैं

अमित भिया ये बेजबरन की बात हैं
ये मेरे ही जस्बात हैं
किसी को समझ आ रा हो तो ठीक
नी तो कौन  सी नयी बात हैं ......

बस भोत मुस्कुरालिये :)))

Tuesday, 14 August 2012

DIL SE...


ये इतनी ख़ुशी मुझे अच्छी नहीं लगती
हर पल की हँसी मुझे अच्छी नहीं लगती
चलो खुद में थोडा सा दर्द बढ़ा ले
अमित चलो किसी से दिल लगा ले.....

Monday, 13 August 2012

ऐ चाँद


सोने दे ऐ चाँद मुझे
पर खुद को तन्हा ना समझ,
तेरी पीठ के पीछे चमकते
तारे देंगे साथ तेरा
मेरा यार मेरे ख्वाबो में हैं
तन्हा बैठा गुमसुम  सा
ऐ चाँद मुझे अब जाने दे
मेरा यार करे इंतजार मेरा..

                                अमित पंडित

Monday, 6 August 2012

मेरे दोस्त


मेरे दोस्त मुझ से खफा नहीं हो पातें,
गर हो भी जाते तो फिर सो नहीं पातें
ये आलम हैं मेरी मुहब्बत का उन पर
अक्सर वो खुद को भूल जाते और खुद में मुझी पातें.
                                          ...................अमित पंडित

Sunday, 5 August 2012

कुछ जादू हैं मेरी बातों में.......



सब कहते हैं कुछ जादू हैं मेरी बातों में,
तुम भी समझ जाओगे कुछ मुलाकातों में.

ख़ुशी के अश्को में बदल दूंगा हूँ मैं उन आंसू को,
जो भिगोते हैं तेरा दामन रातों में.

दुःख से ना कोई वासता होगा तेरा,
तुम भी मुस्कुराओगे खयालातो में.

इस जहाँ को भुला दोगे ये वादा हैं मेरा,
जब भी देखोगे मेरा हाथ अपने हाथों में.

                                 .............अमित पंडित