Friday, 5 August 2022

छोड़ के...

इंदौर शहर मे ख़ज़ाना छोड़ के, 
बैठे हैं विदेश मे आशियाना छोड़ के, 

कुछ अशर्फीया तो कमा ली मगर, 
बहुत सी दुआओं का मेहनताना छोड़ के, 

चल रहे हैं पंक्ति मे प्यादे की तरह, 
आए थे जो राज-घराना छोड़ के, 

यूं ही पिसते रहे तो नामलेवा ना होगा, 
जाओगे जिस दिन ये ज़माना छोड़ के, 

... अमिदित्या