Monday, 9 October 2023

बूढ़ी दादी

एक किसी शनिवार शाम को,
लेने को दूध और थोड़ी सब्ज़ी,
मैं भाग रहा था बस पकड़ने,
जो जा रही थी सुपरमार्केट तक,

उसी बस पकड़ने को,
 साथ मेरे ही भाग रही थी,
अस्सी वर्षीय बूढ़ी दादी भी,

लड़खड़ाते कदम, 
कांपते हाथ,
हाफती सांसे,
धुजनी भरी आवाज़,

शायद वह भी लेना चाहती होगी,
कुछ खाने कुछ पीने का सामान,

यूरोपियन परिवारों के,
बाकी बुजुर्गों की तरह, 
वह भी जानती होगी,
कोई नही हैं घर में उसके,
जो लाकर दे दे,
दो वक्त की ब्रेड,
थोड़े से फल,
सलाद की भाजी,
और पीने का पानी,

वह भी जानती होगी,
के छूट गई ये बस तो,
भूखा रहना होगा,
क्योंकि रविवार को यहां,
सब कुछ बंद जो रहता है,

वह जानती होगी,
उसकी मां ने भी,
यही सब झेला होगा,
वह जानती होगी,
उसे भी ये झेलना हैं।

........अमिदित्या

Wednesday, 14 June 2023

टूटे मकबरे

टूटे मकबरे महान इतिहास की कहानी कहते हैं,
कुछ शहंशाहों के हिस्से अभी भी यहां रहते हैं,
जो ज़ख्म दिए इस जहां को, वो कोई नही कहता,
क्या क्या लोग सहते थे, क्या क्या लोग सहते हैं।
अमिदित्या 

Thursday, 23 March 2023

कम सामान है

अच्छों की अच्छाइयों से खुश नहीं 
बुरो की बुराइयों से परेशान है 
इतना तो दिया है उस भगवान ने 
फिर भी शिकायत है कि कम सामान है

..अमिदित्या 

Thursday, 9 February 2023

वास्कोडिगामा

महसूस करते हैं कभी-कभी,
खुद में एक वास्कोडिगामा,
अनुभवों में कुछ खोजना,
फिर अनुजों को बताना।

..अमिदित्या