Friday, 14 December 2018

बेफ़िक्री

सारी फ़िक्र बेफ़िक्री मे तब्दील हो गयी,
जेसे ही मोबाइल की बैट्री पे नब्बे लिखा देखा

Thursday, 8 November 2018

तो बात बने......

तुम्हारे एलान-ए-तरक्की  से तरक्की आ जाए तो बात बने,
इस चीख से दो वक़्त की रोटी मिल जाए तो बात बने,
यूँ तो इश्तेहारौं से भरे पढ़े बाज़ार तुम्हारी योजनाओं के,
किसी योजना को अमली जामा पहनाऔ तो बात बने।

सज़ा आ जाए

मर्ज़ होने के पहले ही दवा आ जाए
कुछ कहने के पहले ही  मज़ा आ जाए
बेसब्री का आलम तो अब यह है मेरे ख़ुदा
के गुनाह करूं बाद मे, पहले सज़ा आ जाए

Tuesday, 23 October 2018

दिल से

यकीनन, ख़ुदा ने तुझे, जन्नत में, इत्मिनान से बैठ कर, बनाया होगा,
इतनी खूबसूरत मिट्टी इस धरती पर होने से रही।

Sunday, 30 September 2018

तवज्जो..

लब्ज़ौ को नहीं नज़रों को तवज्जो देना,
बड़ा ही मुश्किल होता हैं आँखों से झूठ कहना।
                                       ......... अमिदित्या

Friday, 24 August 2018

प्यार

इस प्यार की मझधार में
तुझ में डूबा, सो पार मैं,

Tuesday, 26 June 2018

वजन

भले ही शतक मारे वजन तेरा ,
फिर भी मां कहती है
दुबला हो गया बेटा मेरा।

Sunday, 17 June 2018

वरना सिहासन खाली करो देखो यह प्रजा आती है

तुमने जब यह बात कही
के सब गलत और मैं सही
पर तुम भूल गए
और तुमने देखा नहीं
4 साल पहले जो वादे किए थे
मैंने सुना था मैं था वही
सोचा तुमने कि कहना है कह दो
यह तो भोले हैं कोई याद रखेगा नहीं

पर मुझे याद है
जो सारी बात है
सब झूठ है
सब बकवास है
जो कहा था विकास है
वह दिख रहा विनाश है

पर
सच्चाई सामने आती है
प्रजा समझ जाती है
जो किया है वह दिख जाता है
खोखली बातें भरमाती हैं

विरोध के स्वर गूंज रहे
फिर भी आंखें मूंद रहे
क्या यही विकास है तुम्हारा
कि प्रजा की आंखों में बूंद रहे

संभल जाओ और  खींचो वो कदम
जो प्रजा को सताती है
वरना सिहासन खाली करो
देखो यह प्रजा आती है

   .........अमित अमिदित्या पंडित

Monday, 26 March 2018

खुद से 

खुद से बात करा कर पगले,
खुद को जान पाएगा,
एक बार जो समझा खुद को,
जो चाहेगा पाएगा.....

Monday, 5 March 2018

बुलंद रखो।

इस जहां की अफरा तफरीह में,
तुम अपना मन मलंग रखो।
भले ही बहरों का इलाका हो,
अमित अपनी आवाज़ बुलंद रखो।

Friday, 2 March 2018

रंगो का नशा

पक्के रंगो सा तू मेरी रगों में बसा है
तेरे बिन अब तो हर रंग सज़ा है
इस होली पर भांग भी असर ना दे
तेरे हाथों से लगे जो गुलाल तो नशा है।
                 ........ अमित पंडित

Thursday, 8 February 2018

सो जा.....

अब की बार तू मुझसा हो जा,
भूल जा खुद को, मुझ में खो जा,
ये जो लिपटी है उलझन कई सारी,
उन्हे उतार फेक, करीब आ, और सो जा।
....................... ‌‍अमित पंडित