A Mirror of Mine......
पक्के रंगो सा तू मेरी रगों में बसा है तेरे बिन अब तो हर रंग सज़ा है इस होली पर भांग भी असर ना दे तेरे हाथों से लगे जो गुलाल तो नशा है। ........ अमित पंडित
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