DIL SE.....
A Mirror of Mine......
Monday, 24 May 2021
छठी वैवाहिक वर्षगांठ
छह गुज़रे साठ बाक़ी हैं,
कहने को कई बात बाक़ी हैं,
समाया तो तुझमे हर कण हूँ,
लगे फिर भी के मुलाकात बाक़ी हैं।
छठी वैवाहिक वर्षगांठ
प्रीत तुझ संग लागी ऐसी,
मैं पानी तू चंदन जैसी,
बँधी हैं जो डोर तुझ से,
मुझ पतंग को फ़िक्र कैसी।
छठी वैवाहिक वर्षगांठ
मिलन का पहर था,
जाने दिल किधर था,
अलग नज़रिए के थे बाकी सारे,
मंडप में हम-नज़र था।
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