तुम बस सहते रहो, कुछ ना कहो
अमित कहोगे तो पछताओगे,
अपराधी कहलाओगे.
किसने दिया कहने का अधिकार,
यह तो हैं हमारा व्यापार,
तुम्हारा नहीं है कोई सरोकार,
कहोगे तो .....
यदि कहना है तो शर्त लगेगी,
हर कलम हमारे ही शब्द कहेगी,
कुछ और कहा तो ज़िल्लत मिलेगी,
कहोगे तो ...
मुनासीब होगा के चुप ही रहो,
चुपचाप यूँही अब सब सहो,
भूलो मत औकात में रहो,
कहोगे तो....
सरकार हमारी है तो हम कहेंगे,
किसी और का हम ना सुनेंगे,
जो ज़्यादा कहेंगे वो दंड भरेंगे,
कहोगे तो .....
स्वीकार्यता की जगह नहीं है,
हमारे सिवा कोई अजेय नहीं है,
तुम्हारी माने कोई वजह नहीं है,
कहोगे तो ....
एक ही बात पर तुम शसक्त बनोगे,
कह दो के तुम भक्त बनोगे,
तब तक तुम निशक्त रहोगे,
कहोगे तो...
हुई लंबी कतारें तो क्या,
लोग जान गवां रे तो क्या,
आंसू गरीब बहा रे तो क्या,
सेठ बैठ कर खा रे तो क्या,
परेशान हो रहे सारे तो क्या,
विरोधी हो जाये हमारे तो क्या,
सुख चैन हो रहे किनारे तो क्या,
वक्त दे रहा इशारे तो क्या,
सब भगवान सहारे तो क्या,
अब भी सुन लो हम कहते क्या,
तुम बस सहते रहो, कुछ ना कहो
अमित कहोगे तो पछताओगे,
अपराधी कहलाओगे.
अमित कहोगे तो पछताओगे,
अपराधी कहलाओगे.
किसने दिया कहने का अधिकार,
यह तो हैं हमारा व्यापार,
तुम्हारा नहीं है कोई सरोकार,
कहोगे तो .....
यदि कहना है तो शर्त लगेगी,
हर कलम हमारे ही शब्द कहेगी,
कुछ और कहा तो ज़िल्लत मिलेगी,
कहोगे तो ...
मुनासीब होगा के चुप ही रहो,
चुपचाप यूँही अब सब सहो,
भूलो मत औकात में रहो,
कहोगे तो....
सरकार हमारी है तो हम कहेंगे,
किसी और का हम ना सुनेंगे,
जो ज़्यादा कहेंगे वो दंड भरेंगे,
कहोगे तो .....
स्वीकार्यता की जगह नहीं है,
हमारे सिवा कोई अजेय नहीं है,
तुम्हारी माने कोई वजह नहीं है,
कहोगे तो ....
एक ही बात पर तुम शसक्त बनोगे,
कह दो के तुम भक्त बनोगे,
तब तक तुम निशक्त रहोगे,
कहोगे तो...
हुई लंबी कतारें तो क्या,
लोग जान गवां रे तो क्या,
आंसू गरीब बहा रे तो क्या,
सेठ बैठ कर खा रे तो क्या,
परेशान हो रहे सारे तो क्या,
विरोधी हो जाये हमारे तो क्या,
सुख चैन हो रहे किनारे तो क्या,
वक्त दे रहा इशारे तो क्या,
सब भगवान सहारे तो क्या,
अब भी सुन लो हम कहते क्या,
तुम बस सहते रहो, कुछ ना कहो
अमित कहोगे तो पछताओगे,
अपराधी कहलाओगे.
