Sunday, 20 October 2019

तुम्हें बताती भी तो कैसे..

ठहरी हुई थी मुद्दत से जो बात, जुबां पर आती भी तो कैसे,
मैं अपना हाल-ए-दिल, तुम्हें बताती भी तो कैसे

बस गया था निगाहों में तेरा जो चेहरा,
वो किसी और को दिखाती भी तो कैसे,

तू टकराता रहा मेरी राहों में, मुझसे अक्सर,
पर मैं तेरी राहों में तुझसे टकराती भी तो कैसे,

तुझे तन्हा खड़ा देखा, फिर भी तुझ तक आ न पाई,
मैं अपनी तन्हाइयों से लड़ पाती भी तो कैसे,

बहुत कोशिशों बाद, कुछ अक्षर जोड़ें तो थे मैंने,
पर उन शब्दों को बयान कर पाती भी तो कैसे,

वादा किया था खुद से, के करीब आकर बताऊंगी तुझे सब कुछ,
पर दूरियां ही इतनी थी, कि वादा निभाती भी तो कैसे,

ठहरी हुई थी मुद्दत से जो बात, जुबां पर आती भी तो कैसे,
मैं अपना हाल-ए-दिल, तुम्हें बताती भी तो कैसे ।

अमिदित्या..... 

Wednesday, 16 October 2019

चंदा भी अच्छा लगता हैं

हर वक़्त गरम क्यों रहती हो
मुझे ठंडा भी अच्छा लगता हैं
सूरज क्यों बनना हर पल
मुझे चंदा भी अच्छा लगता हैं 

Monday, 14 October 2019

तुम याद आ गए

जब देखा एक जोड़े को
चलते
ठहरते
टहलते
टकराते
ठहठहाते
रूठते
मनाते
एक दूजे को टकटकाते
दुनिया से बेख़बर
हाथों मे हाथ डाले
चले आते
तुम याद आ गए

Tuesday, 8 October 2019

और चल उठे...

दूजे के दिए बचाने मे,
अपने हाथ ही जल उठे।

प्रेम राग सी लगते थे कभी,
मेरे अल्फाज़ आज खल उठे।

गए थे मज़दूरी पे जिनके ख़ातिर,
वो ही बक्सा लिए और चल उठे।

बुखार हो ना हो।

जड़ बुद्धि कर दो मुझे,
मेरा कोई विचार ना हों।

विमुक्त विरक्त कर दो मुझे,
किसी से सरोकार ना हो।

दवा तो तुम दे ही दो मुझे,
भले ही बुखार हो ना हो।

Tuesday, 1 October 2019

तेरी याद आ रही है

क्यों हवाएं इतनी सरसरा रही हैं,
क्यों ये पेड़ों को डिगा रही हैं,
क्यों ये पत्तों को गिरा रही हैं,
क्या इन्हें भी तेरी याद आ रही हैं।
.... अमिदित्या