Thursday, 15 August 2013

अब और नहीं.

कुछ करने की बात पर
अब बातचीत और  नहीं,
दिखा दो इस दुनियाँ को,
हम कभी कमज़ोर नहीं.

रक्त बह रहा हैं अब
आँखों से अश्रु नहीं,
चाहे जो हो देखेंगे अमित,
 करेंगे वही जो हो सही.

कुछ करने की बात पर
अब बातचीत और नहीं.

Friday, 25 January 2013

एक विचित्र सा विचार हैं


एक विचित्र सा विचार हैं,
क्यों ना जीत ही हर बार हैं,
पराजित हो क्यों आदमी,
हर बार  ही लाचार हैं.

पराजय क्यों होती हैं यह,
चिंताए क्यों देती हैं यह,
विलुप्त हो रहा चैन क्यों,
क्यों ये दुःख का अम्बार हैं.

पूछा मैंने ऐसा ज्यों ही,
कह दिए प्रभु मुझसे त्यों ही,

सुख दुःख तो मेरे प्रसाद हैं,
जो मिलता हर बार हैं,
सच्चे दिल से प्रयत्न करे जो,
अमित फिर खुले विजय द्वार हैं.

Tuesday, 15 January 2013

Dil se........


मिल रही हे मेरे सागर में वो नदी की तरहा अमित
अब पहचान ना पाता हूँ की कहाँ  वो हैं और कहाँ मैं