Friday, 30 September 2011

दिल से.........


कभी दिल से शिकायत होती हैं,
कभी दिल की इबादत होती हैं,
अक्सर में दिल से हैरान हो जाता हूँ,
अक्सर में दिल से परेशान हो जाता हूँ,
और कभी कभी यह भी होता हैं अमित
कि मैं इसी पर मेहरबान हो जाता हूँ.........

Saturday, 24 September 2011

विचित्र ....



विचित्र विचार का उन्माद हैं,
कुछ मोन हैं कुछ संवाद हैं,
कुछ शांत झील सा ठहराव
कुछ भीषण जल प्रपात हैं.
कुछ पथ के तिनके सा सूक्ष्म हैं,
कुछ वृहद उन्मुक्त आकाश हैं,
कभी जीवन का निर्मल जल
कभी चिता की आग हैं.
कभी मिलन का एक क्षण हैं,
कभी वियोग आघात हैं,
कभी तो यह स्वयं पर भी
करता नहीं विश्वास  हैं.
विचित्र विचार का उन्माद हैं,
कुछ मोन हैं कुछ संवाद हैं.....

Thursday, 22 September 2011


कभी रहा करती थी मेरे साथ वो , अब उसका साथ बस तस्वीर में ही बाकि हैं..
पर उससे कोई शिकायत नहीं हैं मुझे अमित, उसे भी हक़ हैं अपने दिल की सुनने का......

Wednesday, 21 September 2011

मैं जानता हूँ


मैं जानता हूँ तू ना मिलेगी मुझको
पर क्या मिल जाना ही सब कुछ होता हैं ?
मुझे तो पाने की राहत से ज़ादा , इंतजार में सुकून होता हैं........

Monday, 12 September 2011

दो ही अंजाम होते हैं,


दो पल की ज़िन्दगी के दो ही अंजाम होते हैं,
दिल के जीते जीत हो
दिल के हारे हार ..........

Sunday, 11 September 2011

कौन हैं.......


मेरे हालत कुछ इसे हैं अब, अपने ही शहर में अजनबी हूँ मैं.
यु तो दिखते हैं जाने पहचाने कई, पर इनमे से अपना कौन हैं.

तस्वीर सा हो गया हैं ज़माना सारा, सब देखते हैं मुस्कुराकर ज़ख्म मेरे,
इसे बुज़दिली कहू या बेपरवाही उनकी, सब देख कर भी कहता कौन हैं.

हिम्मत बढ़ाते थे जो हाथ कभी , अब दूर से ही जुड़े हुए हैं,
इन तकलीफों के साये में मेरे पास आता कौन हैं

कुछ ना कर सका तू अब तक, ये कह कर महबूब भी दूर हो गया मुझसे,
नाकारा सी ज़िन्दगी में आज कल, मुझसे दिल लगता कौन हैं.

Friday, 9 September 2011

अच्छा होता


ज़िन्दगी जो खर्ची हैं मैंने बेपरवाहो की तरह ,
अक्सर यूँ लगता हैं की कुछ कर लेता तो अच्छा होता
दिखता हैं जो बंद आँखों में मुझे,
आंखे खोलता तो वो ख्वाब ना रहता...........

Thursday, 8 September 2011

क्यों नहीं होता....


हमेशा क्यों इस ख्वाहिश में रहता हूँ अमित
की चुप रहू और वो सब समझ जाए .....
दिल के पास रहने पर भी उसे यह एहसास क्यों नहीं होता....

DIL SE


बड़ी मुद्दतो के बाद यह तोहफा पाया हैं,
मेरा दिल आज फिर तन्हाई में आया हैं............

कुछ ऐसा कर


खुदा कुछ ऐसा कर कि मेरा दर्द मेरी ताक़त बने और मुझे मेरी मंज़िल मिले.
ताकि मैं अपने दर्द देने वाले का भी शुक्रिया अता कर सकु ...........

यु भी तो हो


बहती हैं मेरी निगाहों में तुझसे मिलने की चाहत कोई ...
कभी यु भी तो हो की कोई अश्क तेरी निगाहों में भी मचले ....

हैरान हूँ


मुझे खुद से मुहब्बत और बड़ गई हैं, इसीलिए खुद से शिकायत भी बड़ गई हैं.
अब हैरान हूँ की खुद से इश्क करू या तकरार.

हार हो....


हार हो तो विचार कर, फिर खड़ा हो वार कर.
कोशिशो को साथ रख, तू ही जीतेगा याद रख.
जीत हो तो गर्व कर, पर ना कभी अहंकार कर.
हसरते होगी पूरी तेरी, मीत यह विश्वास कर.
हार हो तो विचार कर, फिर खड़ा हो वार कर.

पापा कहते हैं...

पापा कहते हैं हमेशा यूँ ही होता हैं, जो दिल से चाहता हैं वो ही पाता हैं.
तू भी कर मेहनत सब ठीक हो जाएगा, पापा कहते हैं तू भी अपनी मंज़िल को पाएगा....

Wednesday, 7 September 2011

ढूंढ़ रहा हूँ..........


जीने के इशारे ढूंढ़ रहा हूँ , खोये हुए किनारे ढूंढ़ रहा हूँ 
तेरी बेरुखी बर्दाश्त नहीं होती, कोई रुख मेरी और ढूंढ़ रहा हूँ.

तेरे लबो पर रहते थे जो लब्ज़ कही खो गए हैं मेरे ही कारण
मिल जाए तुझे फिर से वो लब्ज़, वो वजह वो कारण ढूंढ़ रहा हूँ 

खता की मैंने जो बेपरवाह हो गया था मैं
कर सकू तेरी परवाह वो मोका वो आलम ढूंढ़ रहा हूँ 

इश्क होता हैं मुश्किल से , उससे भी मुश्किल उसे जाताना होता हैं
जाता सकू मैं मेरा प्यार तुझे , वो वक्त वो पल ढूंढ़ रहा हूँ.

तेरे साथ रहू मैं उम्र भर बस यही एक ख्वाब हैं मेरा 
मेरा ख्वाब पूरा कर  सके वो पूजा वो इबादद ढूंढ़ रहा हूँ