जीने के इशारे ढूंढ़ रहा हूँ , खोये हुए किनारे ढूंढ़ रहा हूँ
तेरी बेरुखी बर्दाश्त नहीं होती, कोई रुख मेरी और ढूंढ़ रहा हूँ.
तेरे लबो पर रहते थे जो लब्ज़ कही खो गए हैं मेरे ही कारण
मिल जाए तुझे फिर से वो लब्ज़, वो वजह वो कारण ढूंढ़ रहा हूँ
खता की मैंने जो बेपरवाह हो गया था मैं
कर सकू तेरी परवाह वो मोका वो आलम ढूंढ़ रहा हूँ
इश्क होता हैं मुश्किल से , उससे भी मुश्किल उसे जाताना होता हैं
जाता सकू मैं मेरा प्यार तुझे , वो वक्त वो पल ढूंढ़ रहा हूँ.
तेरे साथ रहू मैं उम्र भर बस यही एक ख्वाब हैं मेरा
मेरा ख्वाब पूरा कर सके वो पूजा वो इबादद ढूंढ़ रहा हूँ
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