Saturday, 24 September 2011

विचित्र ....



विचित्र विचार का उन्माद हैं,
कुछ मोन हैं कुछ संवाद हैं,
कुछ शांत झील सा ठहराव
कुछ भीषण जल प्रपात हैं.
कुछ पथ के तिनके सा सूक्ष्म हैं,
कुछ वृहद उन्मुक्त आकाश हैं,
कभी जीवन का निर्मल जल
कभी चिता की आग हैं.
कभी मिलन का एक क्षण हैं,
कभी वियोग आघात हैं,
कभी तो यह स्वयं पर भी
करता नहीं विश्वास  हैं.
विचित्र विचार का उन्माद हैं,
कुछ मोन हैं कुछ संवाद हैं.....

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