Monday, 31 October 2011

कोशिशें....

मेरी कोशिशें नादाँ हो गयी, मचल उठी और कह पड़ी,
कब तक करता रहेगा मुझे,
इतनी हार मिली फिर भी क्या, समझ ना आई तुझे
मैंने कहा तू रुसवा ना हो, ये किस्मत कब तक सोती रहेगी
कुछ हो ना हो, कोशिशें तो होती ही रहेगी.............

Sunday, 30 October 2011

DIL SE..

अक्सर ज़ोर से लगने पर चलना सीखा देती हैं ठोकर,
पर यदि वो प्यार में लगे तो इन्सान दोड़ना सीख जाता हैं...........

Saturday, 29 October 2011

DIL SE..

मुझे लगता हैं अक्सर यह,
कल जो बिता वो एक ख्वाब हैं मेरा.
जब उठ कर सोचता हूँ उस कल को,
हर कल एक हिसाब हैं मेरा.

कुछ कमा लेता हूँ मैं हर शाम,
कुछ गँवा देता हूँ मैं हर शाम.
गर गँवाना ज़ादा हो तो,
दुःख बेहिसाब हैं मेरा.

मेरे रास्ते टकराए उनकी राह से,
ज़िन्दगी साथ चलने का ठान बैठे.
मोड़ आया और मुड़ गए वो,
अब हर कदम पर सैलाब हैं मेरा.

एसा हिसाब उसने किया हैं,
सब कुछ देकर खुद ही चल दिया हैं.
उसे खोकर अब खुद को पा रहा हूँ,
उसका साथ अब केवल ख्वाब हैं मेरा.

Thursday, 27 October 2011

प्यार....

प्यार एक नाम हैं, मेरे एक ख्वाब का,
पा सकू मैं अगर, खुशनसीब मैं रहूँ.
अगर न मिल सके मुझे वो तो
प्यार मेरा खुश रहें............

DIL SE......

जीवन एक त्यौहार हैं, खुशियों का व्यापार हैं.
प्रेम मूल तत्व यहाँ, प्रेमी एक खरीदार हैं.....

Tuesday, 25 October 2011

विचार

जब एकांत में कोई विचार आते हैं
वो आपको आपका परिचय करते हैं
ध्यान से समझे कोई उन्हें तो
वो आपका जीवन बदल जाते हैं..............

Saturday, 8 October 2011

DIL SE..

मुझसे बिछड़ अक्सर मेरे ही तकिये में छुप जाते थे मेरे ही आंसू
तभी शायद ये जहाँ मेरा दर्द समझ ना सका
सोचा बाँट लू दर्द अपना इस ज़माने के साथ
पर रो सकूं जिस पर वो कन्धा मिल ना सका............

तुझे पा कर रहूँगा

मेरी मुहब्बत के इन्तिहाँ तू ले कितने भी,
मुझे यकीं हैं के मैं तुझे पा कर रहूँगा

कई शिकायत हैं तुझे मुझसे आज भी,
पर आगे मैं कोई शिकायत का मौका नहीं दूंगा

यकीं हो चला हैं तुझे मेरी बेरुखी पर,
मैं अपने प्यार पर यकीं दिला कर रहूँगा

यह तो सच हैं की नहीं रह पाउँगा मैं तेरे बिना,
तुझे यकीं हो जाए इस बात का, इतनी  मुहब्बत जता कर रहूँगा

तुझे लगता हैं खो गया हैं तेरा प्यार कहीं,
मेरे प्यार से वो एहसास जगा कर रहूँगा

मेरी मुहब्बत के इन्तिहाँ तू ले कितने भी,
मुझे यकीं हैं के मैं तुझे पा कर रहूँगा...........

Friday, 7 October 2011

दिल से ......

ये एक नयी सुबह हैं
न कोई गम न कोई कलह हैं
नया सा दिख रहा हे ये आसमां
नयी से हर डगर हैं
बस चल निकला हूँ मैं घर से
मंजिल की किसे खबर हैं
अमित मानो तो बड़ी आसां हैं ये ज़िन्दगी
और बड़ा आसां ये सफ़र हैं.............

Thursday, 6 October 2011

वक्त.....

वक्त हर बात का एहसास करा देता हैं
वक्त हर सांस का मतलब समझा देता हैं
वक्त दर्द देता हैं अगर
तो वक्त ही मरहम लगा देता हैं............

Wednesday, 5 October 2011

मैं..........

कोशिशे कर हारा मैं, हार कर फिर की कोशिशें,
एक कदम चलने की चाहत में, गिरता हूँ कई बार मैं.
फिर भी हूँ अटल मैं, इरादों से सबल मैं,
अमित कंधो पर बोझ लिए रचने चला संसार नया

Saturday, 1 October 2011

वो कहती हैं ............


अचानक ही वो सहम जाती हैं और पूछ लेती हैं मुझसे
तुम मुझे कभी छोड़ोगे तो नहीं..
और मैं कहता हूँ मेरी जान हो तुम,
अपनी जान के बिना कोई रह सकता हैं भला..

वो कहती हैं डर लगता हैं मुझे
तुम साथ न होंगे तो में क्या करुँगी
मैं कहता हूँ बड़ी ही खुदगर्ज़ हो तुम
कभी सोचा हैं की तुम न होगी तो मेरा क्या होगा....

मैं कहता हूँ की भरोसा कर , हम हमेशा रहेंगे  साथ
पाओगी हमेशा तुम अपने हाथो में मेरे हाथ

वो कहती हैं की उसे भरोसा हैं मुझ पर
बस अपनी किस्मत पर यकीं कम हैं..
मैं कहता हूँ यकीं कर हमारी किस्मत पर,
मेरे साथ तुम्हारी किस्मत अकेली नहीं

कुछ मिल जाने पर भी वो खुश ना होती हैं
कहती हैं तुम्हे ना मिला तो मुझे मिलने का क्या मतलब हैं
इतनी मोहब्बत हैं उसे मुझसे के सब पाने पर भी न होने का एहसास हैं उसे..........