Saturday, 29 October 2011

DIL SE..

मुझे लगता हैं अक्सर यह,
कल जो बिता वो एक ख्वाब हैं मेरा.
जब उठ कर सोचता हूँ उस कल को,
हर कल एक हिसाब हैं मेरा.

कुछ कमा लेता हूँ मैं हर शाम,
कुछ गँवा देता हूँ मैं हर शाम.
गर गँवाना ज़ादा हो तो,
दुःख बेहिसाब हैं मेरा.

मेरे रास्ते टकराए उनकी राह से,
ज़िन्दगी साथ चलने का ठान बैठे.
मोड़ आया और मुड़ गए वो,
अब हर कदम पर सैलाब हैं मेरा.

एसा हिसाब उसने किया हैं,
सब कुछ देकर खुद ही चल दिया हैं.
उसे खोकर अब खुद को पा रहा हूँ,
उसका साथ अब केवल ख्वाब हैं मेरा.

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