मुझसे मोहब्बत थी तुम्हे ,
पर सुरूर मेरा भी कम न था.
वो इंतजार में थी की माफ़ी मांग लु मैं,
पर गुरुर मेरा भी कम न था.
गुनाहगार तो था मैं ये मानता हूँ,
पर कुसूर तेरा भी कम न था .
मेरे दिल के दामन पर, कुछ फूल ख्वाब के बसते है,
मुकम्मल जहाँ पाने को मेरे संग यह भी तरसते है,
एहसासों की स्याही जाने क्या लिख आयी,
अब जाने क्यों इन आँखों से मोती खुशियों के बरसते हैं.......