मेरी मंजिलो के पार भी, एक राह होगी नयी.
जहा मैं हूँ तुम हो और तीसरा कोई नहीं..
बादलो का एक महल, आसमान के पार हो
हम तुम रहे जहा और इज़हार हो इकरार हो
हाथो में ले कर हाथ मेरा, हाल-ऐ-दिल कहती तुम
न कोई फिक्र ना कोई चिंता बस यूँही रहते हम गुम
इज़हारे इश्क होता हर लम्हा हर पल दिल बेक़रार हो
और इस मुहब्बत की आग में दोनों जलने को तैयार हो
पर तुम अभी तो सिर्फ ख्वाबो में हो खोयी सी कुछ किताबो में हो
पर फिर भी जाने क्यों लगता हैं तुम यही हो, यही कही हो...