Monday, 28 May 2012

Dil Se


मेरी मंजिलो के पार भी, एक राह  होगी नयी.
जहा मैं हूँ तुम हो और तीसरा कोई नहीं..

बादलो का एक महल, आसमान के पार हो
हम तुम रहे जहा और इज़हार हो इकरार हो

हाथो में ले कर हाथ मेरा, हाल-ऐ-दिल कहती तुम
न कोई फिक्र ना कोई चिंता बस यूँही रहते हम गुम

इज़हारे इश्क होता हर लम्हा हर पल दिल बेक़रार हो
और इस मुहब्बत की आग में दोनों जलने को तैयार हो

पर तुम अभी तो सिर्फ ख्वाबो में हो  खोयी सी कुछ किताबो में हो
पर फिर भी जाने क्यों लगता हैं  तुम यही हो, यही कही हो...

Wednesday, 23 May 2012

Dil se


तेरी यादों की उलझनों में खोया हुआ हूँ
तू मुझे दिख रही हैं या मैं अभी  तक सोया हुआ हूँ

Friday, 11 May 2012

कौन हैं.......



मेरे हालत ऐसे हैं अब, अपने ही शहर में अजनबी हूँ मैं,
यूं तो दिखते हैं जाने पहचाने कई पर इनमे से अपना कौन हैं

तस्वीर सा हो गया हैं जहाँ सारा,  सब देखते हैं मुस्कुरा कर ज़ख्म मेरे
इसे बुज़दिली कहूं या बेपरवाही उनकी , सब देख कर भी कहता कौन  हैं

हिम्मत बढ़ाते थे जो हाथ कभी अब दूर से ही जुड़े हुए हैं
इन तकलीफों के साये में मेरे पास आता कौन हैं

ना कुछ  कर सका तू अब तक यह कह  मेरा महबूब भी दूर हो गया मुझसे
नाकारा सी ज़िन्दगी में आज कल मुझसे दिल लगाता कौन हैं

Tuesday, 1 May 2012

Dil Se...



मेरे पास की राह पर वो शख्स मुझे दिखा
कुछ सहमा सा था वो चलते चलते वो रुका

आँखों में उसके मुहब्बत का एक एहसास था
दूर था वो मुझसे पर मैं अब भी उसके पास था

उम्मीद थी उसे की मैं अब कुछ कह भी दूंगा
फिर यह हाथ बड़ा कर मैं उसे रोक लूँगा

चाहत थी उसकी कि लिपट जाए मुझसे और थोडा रो ले ज़रा
समां कर मेरी बाँहों में दो पल ज़िन्दगी जी ले ज़रा

पर अब मुश्किल हैं दिल की तू उसका हो सके
फिर बीते लम्हों की तरहा उसकी बाँहों में खो सके

अब ऐतबार ए मुहब्बत ना हो पाएगा कभी उसपर
ये दिल अब ना खो पाएगा कभी उसपर

गिरा हूँ भले ही सूखे पत्ते की तरहा अमित,   ना जुड़ पाउँगा
पर अब तो जल के ही अपना नया जहाँ बसाऊंगा