खुद से बात करा कर पगले,
खुद को जान पाएगा,
एक बार जो समझा खुद को,
जो चाहेगा पाएगा.....
Monday, 26 March 2018
Monday, 5 March 2018
बुलंद रखो।
इस जहां की अफरा तफरीह में,
तुम अपना मन मलंग रखो।
भले ही बहरों का इलाका हो,
अमित अपनी आवाज़ बुलंद रखो।
Friday, 2 March 2018
रंगो का नशा
पक्के रंगो सा तू मेरी रगों में बसा है
तेरे बिन अब तो हर रंग सज़ा है
इस होली पर भांग भी असर ना दे
तेरे हाथों से लगे जो गुलाल तो नशा है।
........ अमित पंडित
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