Monday, 13 August 2012

ऐ चाँद


सोने दे ऐ चाँद मुझे
पर खुद को तन्हा ना समझ,
तेरी पीठ के पीछे चमकते
तारे देंगे साथ तेरा
मेरा यार मेरे ख्वाबो में हैं
तन्हा बैठा गुमसुम  सा
ऐ चाँद मुझे अब जाने दे
मेरा यार करे इंतजार मेरा..

                                अमित पंडित

No comments:

Post a Comment