कह दू तो उन्हें आपत्ति हैं
नी कहू तो हम पर विपत्ति हैं
सड़क पर चलते सब लोग
क्योकि ये सरकारी संपत्ति हैं
सड़क तो काली काली हैं
लगता हैं वेस्टेनडिज़ वाली हैं
आगे चौराहे पर सर्कल हैं
न बगीचा हैं न माली हैं
इंदौर का बगीचा तो मेघदूत का हैं
जहा आवारा जोड़ा बेठता हैं
जो कोई पकड़ ले नजदीकियों में
तो फिर बगलों को ही देखता हैं
अमित भिया ये बेजबरन की बात हैं
ये मेरे ही जस्बात हैं
किसी को समझ आ रा हो तो ठीक
नी तो कौन सी नयी बात हैं ......
बस भोत मुस्कुरालिये :)))
नी कहू तो हम पर विपत्ति हैं
सड़क पर चलते सब लोग
क्योकि ये सरकारी संपत्ति हैं
सड़क तो काली काली हैं
लगता हैं वेस्टेनडिज़ वाली हैं
आगे चौराहे पर सर्कल हैं
न बगीचा हैं न माली हैं
इंदौर का बगीचा तो मेघदूत का हैं
जहा आवारा जोड़ा बेठता हैं
जो कोई पकड़ ले नजदीकियों में
तो फिर बगलों को ही देखता हैं
अमित भिया ये बेजबरन की बात हैं
ये मेरे ही जस्बात हैं
किसी को समझ आ रा हो तो ठीक
नी तो कौन सी नयी बात हैं ......
बस भोत मुस्कुरालिये :)))
This seems like an Ehsan Qureshi Style poem :P
ReplyDelete:) ;)
ReplyDelete