Tuesday, 27 October 2020

निगाहों से गुफ़्तगू

निगाहों से गुफ़्तगू का यही लुत्फ़ हैं जनाब, 
वो कहती रही बिना कुछ कहे, 
मैं सुनता रहा बिना कुछ सुनें।

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