Thursday, 13 September 2012

ये तो बस एक परछाई हैं...



ये घनघोर काली परछाई हैं
ये रात फिर चढ़ आई हैं
पर दिल तू चिंता न कर
ये तो बस एक परछाई हैं
कल जब चढ़ेगा सूरज तेज
और इस अंधियारे को भेद
किरण आएगी आंगन तेरे
पूरे होंगे सपने तेरे
तो अमित काहे की रुसवाई हैं
ये तो बस एक परछाई हैं...

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