Saturday, 24 December 2011

ख्वाहिश.....


ख्वाहिश है ये के मेरे साथ तुम रहो , ख्वाहिश है ये के ये बात तुम कहों.
ख्वाहिश है ये हवा सा बनू मैं, ख्वाहिश है अमित पंछी बन मेरे साथ तुम बहो

शीतल जल हो अगर तुम किसी ताल का, ख्वाहिश है मैं ताल बन तुझको बाँहों में समेटे रखूँ
अगर उज्जवल मोती हो तुम तेज सफ़ेद चमक लिए, ख्वाहिश है सिप बन तुझे खुद में छुपा रखूँ

ख्वाहिश हैं तुम धड़कन बनो, इन सांसो कि सरगम बनो
मेरे प्राणों में रहो तुम मेरा तन और मेरा मन बनो

मेरी ख्वाहिश तो अपार  हैं, पर तुझ में ही मेरा संसार हैं
अब इस संसार से कोई वास्ता ना मेरा , बस एक तुझ से ही सरोकार हैं ...................

No comments:

Post a Comment