Monday, 5 December 2011

DIL SE....

तेरे जाने के बाद अक्सर सोंचा मैंने,
तू नहीं तो कोई और सही वो नहीं तो कोई और सही,

पर ज़िन्दगी की हकीकत इतनी आसन कहाँ होती हैं,
किसी के जाने पर भी उसकी यादें कहाँ खोती हैं
बाहें फैलाए कब तक इंतजार करू मैं,
 खुद को भुलाये कब तक बेक़रार रहू मैं

मेरे आंसू को पानी समझ ले वो अगर,
मेरी मुहब्बत को बीती कहानी समझ ले वो अगर.

तो फिर क्यों इस खुशफहमी में रहूँ की आएगी वो इक दिन,
 और कहेगी ना रह सकुंगी तुम्हारे बिन

क्यों ऐतबार करू मैं अपने झूठे दिल का,
क्यों बनू तमाशा इस महफ़िल का

ये जस्बात ख़त्म करने होंगी मुझे एक दिन,
सिखाना होगा इस दिल को रहना उसके बिन

मानना होगा की अब इस दिल में कोई और न आ पायेगा,
ये एहसास-ए-दर्द यूँही खत्म हो जाएगा ............

No comments:

Post a Comment