Sunday, 13 April 2014

मेरी ज़िन्दगी को परियों की कहानी कर दे

ख़ुदा अब के बार  ये मेहरबानी कर दे
मेरी ज़िन्दगी को परियों की कहानी कर दे.

मदमस्त फिज़ाओ में लहराती रहे खुशबु फूलो  की
मेरी शामें कुछ ऐसी सुहानी कर दे.

बेफिक्री में उड़ता रहू आसमान-ऐ-जन्नत में
मेरे दिल की इतनी मनमानी कर दे.

ना रहे अब किसी से सरोकार मेरा
ये दुनिया मेरे वास्ते अनजानी  कर दे.

बस रहे तेरा ही ऐतराम ऐ ख़ुदा
मेरे ख़यालात कुछ ऐसे रूहानी कर दे .

बस तू इतनी सी मेहरबानी  कर दे
मेरी ज़िन्दगी परियों की कहानी कर दे.

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