DIL SE.....
A Mirror of Mine......
Thursday, 26 April 2012
KAASH!!!!
तेरी खुशबू के आगोश में हर शाम गुज़ार पाता मैं काश
तेरी बाँहों के साये में कही खो जाता मैं काश
अब होंश नहीं खुद का , खुद से जुदा होने लगा हूँ मीत .
कितनी मोहब्बत हैं तुझसे मैं ये बयां कर पाता काश
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